बैतूल। भगवान के कार्य व पूजा में हम स्वयं को जितना तल्लीन कर देंगे उतनी ही शांति प्राप्त होगी। जिसका विश्वास पक्का है वह स”ाा भक्त है। कई घरों में मनोरंजन के साधन है परन्तु मुस्कान और शांति नहीं है। जीवन में मुस्कान केवल स्नेह और शांति में है। यही श्री कृष्ण की रास लीला है। उक्त उद्गार पंडित सुखदेव शर्मा ने नाग मंदिर के सामने, सरोज भवन, मालवीय वार्ड (खंजनपुर) में भागवत कथा के छटवें दिन व्यक्त किए। पंडित शर्मा ने कहा कि धीरज, क्षमा, पवित्रता, प्रेम, नियंत्रण, ज्ञान, अहिंसा यह भी एक धार्मिक लक्षण हैं। श्रद्धा की शुरूवात गुरू करवाता है। गुरू कभी कमजोर नहीं बस हमारी शिक्षा एकलव्य की तरह हो। उन्होने कहा कि योग, प्रयोग, सहयोग, श्रद्धा से करें। श्रद्धा जगी तो मनुष्य से देवता बन जाने में विलम्ब नहीं है। आयोजक मनमोहन मालवीय व राजेश मालवीय ने सभी से कथा लाभ लेने की अपील की है।

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