बैतूल। न्याय के अभाव में धरने के सतत् 512 वे दिन पूण कर चुके सेवानिवृत्त 72 वर्षीय बीआर घोरसे ने कहा कि दुनिया में सबसे बड़े प्रजातंत्र में ही कथित राष्ट्रनिर्माता शिक्षक को न्याय न मिले, जीवन के अंतिम पड़ाव में भी उसे सडक़ पर संघर्ष करना पड़े तो इससे बड़ा दुखद पहलु क्या हो सकता है? ऐसे ही सतत 22 वर्षो से व्यवस्था, भ्रष्टाचार, नौकरशाही व लालफिता शाही के विरूद्ध संघर्ष कर रहे शिक्षक को ग्राम पंचायत सचिव संघ ने उन्हें समर्थन देते हुए अपने हक की जंग का जुनून को सजग नागरिकों के लिए प्रेरणा स्त्रोत व अनुकरणीय बताया। इस अवसर पर जिलाध्यक्ष पंचायत सचिव संगठन जिला बैतूल लक्ष्मीचन्द अमरूते, जिलाध्यक्ष सहायक सचिव संघ दयाराम नारे, ब्रज यादव, गणेश यादव, काशीनाथ घुडाले, रामदास गोहे, रघूनाथ ठाकरे, दिलीप हजारे, कन्हैयालाल बाथरी, चेतन साहू आदि उपस्थित थे।

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