माखनलाल चतुर्वेदी के बहुआयामी व्यक्तित्व और कालजयी कृतित्व की महत्ता हमेशा रहेगी
बैतूल। दादा माखनलाल चतुर्वेदी सुधी चिंतक, सुकवि और प्रखर पत्रकार होने के साथ-साथ स्वतंत्रता संग्राम के सेनापतियों में से एक थे और सच्चे अर्थों में संपूर्ण मानव थे। उक्त बाते सृष्टि कम्प्यूटर एजूकेशन के तत्वावधान में माखनलाल चतुर्वेदी की जयंती के दौरान संचालक जितेन्द्र पेशवानी ने कही। कार्यक्रम का शुभारंभ माखनलाल चतुर्वेदी की प्रतिमा के समक्ष फूलमाला, दीप प्रज्जवलित कर किया। श्री पेशवानी ने बताया कि माधवराव सप्रे के हिन्दी केसरी ने राष्ट्रीय आंदोलन और बहिष्कार विषय पर निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया था जिसमें युवा अध्यापक माखनलाल चतुर्वेदी का निबंध प्रथम चुना गया। माधवराव सप्रे मध्यप्रांत में होनहार प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें आगे बढ़ाने, राष्ट्रीय आंदोलन के लिए कार्यकर्ता तैयार करने और पत्रकारिता एवं पत्रकारों को संस्कारित करने वाले मनीषी के रूप में समादृत रहे हैं। सप्रेजी को माखनलाल चतुर्वेदी की लेखनी में अपार संभावनाओं से युक्त पत्रकार-साहित्यकार के दर्शन हुए। उन्होंने माखनलालजी को इस दिशा में प्रवृत्त होने के लिए प्रेरित किया। स्वाति शुक्ला ने बताया कि खंडवा के हिन्दी सेवी कालूराम गंगराड़े ने मासिक पत्रिका प्रभा का प्रकाशन आरंभ किया, जिसके संपादन का दायित्व माखनलालजी को सौंपा गया जिसे उन्होने बखूबी निभाया। उन्होने सिद्ध किया की वे हर क्षेत्र में शीर्ष पर हैं। द्वारिका बारस्कर ने बताया कि दादा माखनलाल के बहुआयामी व्यक्तित्व और कालजयी कृतित्व की महत्ता सत्ता की तुलना में बहुत ऊँचे शिखर पर प्रतिष्ठित है और सदैव रहेगी।आभार भारती सोनी ने बताया बीसवीं सदी के पूर्वार्द्ध में अनेक महापुरुषों ने राष्ट्रीय परिदृश्य पर अपने बहुआयामी व्यक्तित्व और कालजयी कृतित्व की छाप छोड़ी है। ऐसे महापुरुषों में दादा माखनलाल चतुर्वेदी का नाम बड़े आदरपूर्वक लिया जाता है। मंच संचालन स्वाति शुक्ला व आभार भारती सोनी द्वारा व्यक्त किया गया। कार्यक्रम में द्वारिका बारस्कर, सुषमा बारस्कर, जाग्रती सरसोदे, राधेश्याम मारूड, प्रकाश साहू, अमृता गुप्ता, सोनम पंडागरे, सोनल देशमुख, शुलभा कुबड़ा सहित बड़ी संख्या में छात्र छात्रायें उपस्थित थे।

Betulcity.com